एर्दोगन को जम्मू कश्मीर का राग अलापना पड़ा भारी; भरी सभा में भारत ने सुनाई खरीखोटी!

India on Recep Tayyip Erdogan Statement: तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन का रुख अक्सर भारत विरोधी रहा है. इस बार रेचेप तैयप एर्दोगन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत विरोधी बयान दिया. संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 80वें सत्र में कश्मीर मुद्दा उठाकर अपनी बौखलाहट दिखाने वाले तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन को भारत ने कड़ा जवाब दिया है. 

शुक्रवार (26 सितंबर) को सरकार ने स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर भारत का आंतरिक मामला है और इसमें किसी बाहरी देश की भागीदारी की जरूरत नहीं है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया से बातचीत में यह बात दोहराई और कहा कि नई दिल्ली के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है.
रेचेप तैयप एर्दोगन को आड़े हाथों लेते हुए जायसवाल ने जोर देकर कहा, “कश्मीर मुद्दे पर हमारा रुख बिल्कुल साफ है और इसमें कोई बदलाव नहीं आया है. भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय मसलों में किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की जरुरत नहीं है.” उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी तरह की बाहरी दखलअंदाजी ना काबिले कुबूल है और भारत इसे पूरी तरह खारिज करता है.

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UNGA में अपने संबोधन के दौरान एर्दोगन ने कहा कि तुर्की भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर समझौते से संतुष्ट है. उन्होंने कश्मीर मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के अनुसार बातचीत के जरिए हल करने की बात कही. इस टिप्पणी को पाकिस्तान के प्रति एर्दोगन के समर्थन के रूप में देखा जा रहा है. यह उनकी उस रुख की पुष्टि करती है जो उन्होंने अपनी पाकिस्तान यात्रा के दौरान अपनाया था. उस समय भी भारत ने इस रुख की तीखी आलोचना की थी.

जायसवाल ने एर्दोगन की इस टिप्पणी को “आपत्तिजनक” बताते हुए खारिज कर दिया. उन्होंने कहा, “हम भारत के आंतरिक मामलों पर इस तरह की टिप्पणियों को स्वीकार नहीं करते. हमने तुर्की के राजदूत के सामने इसका कड़ा विरोध दर्ज कराया. भारत की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता पर इस तरह के अनुचित बयान ना काबिले कुबूल हैं.”

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने आगे कहा कि जम्मू-कश्मीर की जड़ समस्या पाकिस्तान के रवैये और उसकी नीतियों से पैदा होती है. उन्होंने कहा, “बेहतर होता अगर भारत के खिलाफ सीमा पार आतंकवाद का इस्तेमाल करने वाली पाकिस्तान की नीति पर सवाल उठाया जाता. यही नीति जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए सबसे बड़ा खतरा बनी हुई है.”

 

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